भारत और पाकिस्तान दो देश है. दोनों की भाषा लगभग समान है और समस्या भी. दोनों
गरीब भी है और अमीर भी. गरीब इस वजह से कि दोनों ही देश अपने नागरिको की बुनयादी जरूरते अभी
तक पूरी नहीं कर पाए. और अमीर इस वजह से कि भारत में 3 सौ करोड़ रूपये एक सरकार एक महोत्सव को
मनाने पर फूंक देती है. पर मरीजों को दवा उपलब्ध नहीं करा सकती. और पाकिस्तान के
नेताओं की शाही खर्ची तो पुरे विश्व में प्रसिद्ध
है. अमीरी की मिसाल यह कि 5 रूपये कलम अपने छात्रों नहीं दे सकते पर जिहाद के लिए हजारों
रूपये के हथियार पकड़ाने में कोई कोताही नहीं बरतते. आकंड़ो के अनुसार 6 से 7 करोड़ से ज्यादा पाकिस्तानी
नागरिक गरीबी रेखा के नीचे जिंदगी जीने को मजबूर हैं.
बीबीसी की रिपोर्ट पर गौर
करें तो दुनिया में भारत और पाकिस्तान जैसी दूसरी मिसाल नहीं है, जो दुनिया की दूसरी और सातवीं सबसे बड़ी
सेना इसलिए रखते हैं, ताकि इस दुनिया के 25 फीसद गरीबों की रक्षा कर सकें.ये
रक्षा इतनी कीमती है कि उसके लिए हथियार ख़रीदने वाला पहला और दसवां बड़ा देश बन
गया है. पाकिस्तान के वुसअतुल्लाह ख़ान लिखते है कि पश्चिमी देश परमाणु युद्ध से
इसलिए डरते हैं कि एक भी एटम बम चल गया तो 10-15 लाख़ पढ़े-लिखे लोग पहले ही धमाके में मर जाएंगे. लेकिन हमें क्या
आपत्ति, अगर दिल्ली से कोई बम चले या लाहौर से
कोई परमाणु मिसाइल उड़े. ज्यादा से ज्यादा क्या होगा? चालीस पचास लाख़ बेरोजगार या भूखे नंगे ही तो ये धरती खाली करेंगे.
इनका वैसे भी मरना क्या और जीना क्या? इसलिए जब कोई जीनियस प्राइम टाइम एंकर दिल्ली के किसी एयर कंडीशन
स्टूडियो में बैठकर टीआरपी के लाँचर में अपनी जीभ का मिसाइल रख कर चलाता है कि चढ़
दौड़ो... राम भली करेगा. या फिर इस्लामाबाद की किसी बैठक में कोई बावला बुद्धिजीवी
या कोई टकला मंत्री कहता है कि हमने भी चूड़ियां नहीं पहन रखीं, उड़ा देंगे इनको. तो इसके पीछे यही सोच
तो होती है कि ज्यादा से ज्यादा क्या होगा? चालीस पचाल लाख़ या हद एक करोड़ कीड़े-मकोड़े जैसे जीवित ही तो ख़त्म
होंगे. दस साल में फिर इससे ज्यादा पैदा हो जाएंगे.
ऐसे में जब मेरी नजर टाइम्स हायर एजुकेशन
वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग पर पड़ती है तो यक़ीन हो जाता है कि हम जैसों का जोर इस
पर है कि किस तरह दूसरे की नाक एक बार फिर से रगड़ दी जाए. इससे फुर्सत मिले तो
सोचें कि जिस उपमहाद्वीप में दुनिया के 25 फीसद यानी पौने दो अरब इंसान बसते हैं, उसकी हालत ये है कि दुनिया की टॉप दो
सौ यूनिवर्सिटी में यहां की एक भी यूनिवर्सिटी नहीं है. वहीं दुनिया की टॉप एक
हजार यूनिवर्सिटी में सार्क के आठ में से सिर्फ तीन देशों के नाम हैं. जिसमें
श्रीलंका की केवल एक, पाकिस्तान की सात और भारत की 31 यूनिवर्सिटी शामिल है. हां कोई पांच
साल के बच्चों की मौत, सेहत और शिक्षा की सबसे कम सुविधाएं, आतंकवाद, बलात्कार, अल्पसंख्यकों के साथ बुरा सुलूक या फिर
भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद, जातिवाद, गुंडाराज, नॉन स्टेट एक्टिंग में हमारी तरह टॉप-10, टॉप-20 में वर्ल्ड रैंकिंग तक पहुंच कर दिखाएं तो मानें. इसलिए टाइम्स हायर
एजुकेशन वर्ल्ड रैंकिंग जैसे तमाशों से दुखी होने की बिल्कुल जरूरत नहीं. जब हम एक
दूसरे से निपट नहीं लेंगे,
तो शिक्षा, बीमारी, रोजगार जैसे मामूली मुद्दों से भी निपटारे पर भी ध्यान दे लेंगे.
आये दिन बेतुके बयान मीडिया के माध्यम से
प्रसारित होते है, नेता-अभिनेता जबान निकालते है इधर सोशल
मीडिया पर उनके बयान धडल्ले से बिकते है. सब कहते है अभिवयक्ति की आजादी होनी
चाहिए. बिलकुल होनी चाहिए ऐसे ही जैसे द्रोपदी ने दुर्योधन को अंधे का पुत्र अँधा
कहा था और कर्ण ने द्रोपदी को वेश्या! अंत में क्या हुआ? वो बयान ही 18 लाख लोगों को ले मरे थे. इसी तरह आज
पाक- भारत के रहनुमा लगे पड़े है. पूरा विश्व कश्मीर को भारत का हिस्सा मानता है और
बलूचिस्तान को पाकिस्तान का. पर यह दो देश एक दुसरे के हिस्से को उनका हिस्सा नहीं
मानते. एक को कश्मीर आजाद चाहिए तो दुसरे को बलूचिस्तान. एक को कश्मीर के लोग
धन्यवाद कर रहे है दुसरे को बलूचिस्तान के. खैर दोनों देशो की जनता को भी इसी काम
में मजा आता है. पाकिस्तान के अमेरिका में राजनयिक रहे हुसैन हक्क़ानी कहते है कि
सुषमा स्वराज ने अपने भाषण में बताया कि पाकिस्तान की भूमि से होने वाला चरमपंथ
केवल भारत नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए समस्या है. यह कोई नई बात नहीं है. इससे पहले ब्रिटेन के
पूर्व प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने भी कहा था कि दुनिया के 70 फीसदी आतंकवाद का कोई न कोई सिरा, कहीं न कहीं पाकिस्तान से जरूर जुड़ता
है.
पाकिस्तान के लोगों को यह सोचना
चाहिए कि उनके देश का नाम आतंकवाद के साथ क्यों जोड़ा जा रहा है. इसे ख़त्म किए
बगैर क्या पाकिस्तान बाकी दुनिया के साथ अच्छे संबंध रख पाएगा या नहीं? मेरा मानना है कि आतंकवाद के रहते हुए
भारत-पाकिस्तान के रिश्ते सामान्य नहीं हो पाएंगे. ये रिश्ते इसी तरह चलते रहेंगे.
अगर भारत-पाक बुनियादी समस्या का समाधान करना चाहते हैं तो पड़ोसियों के रूप में
एक-दूसरे से बात करनी पड़ेगी. आतंकवाद की धमकी के साथ बातचीत नहीं हो सकती है. वहीं
भारत में किसी को यह नहीं कहना चाहिए कि पाकिस्तान टूट जाएगा या हम उसे तोड़ देंगे.
इसे पाकिस्तान में धमकी की तरह लिया जाता है. बातचीत बिना किसी धमकी के होनी
चाहिए. आतंकवाद ख़त्म होना चाहिए. पाकिस्तान को हाफिज सईद, दाऊद इब्राहिम और मसूद अजहर जैसे लोगों
को बंद करना चाहिए. इस तरह के गुटों को उसे मिटाना होगा. तभी कोई सार्थक पहल हो
सकती है. वरना दोनों देश इसी समस्या से घिरे रहेंगे गरीबी से लड़ना है तो गरीबों के
लिए योजना लाई जाये परमाणु बम से गरीबी नहीं गरीब मरते है...Rajeev choudhary








