Friday, 30 October 2015

देश धर्म के नये क्रन्तिकारी !



अभी पिछले कुछ दिन पहले की बात है, राजीव चौक गेट नम्बर 7 से आगे पालिका बाजार के सामने एक आदमी चाय पी रहा था उसने चाय पीने के बाद प्लास्टिक कप को बराबर में फेंक दिया उसके बाद जेब से सिगरेट की डब्बी से सिगरेट निकलकर उसे खाली कर फेंक दिया मैने उसे कहा की आप कूड़ा क्यों फैला रहे हो इसे डस्टबीन में भी डाल सकते हो? तो उसने कहा में हाइकोर्ट में वकील हूँ ये काम मेरा नहीं है ये काम सफाई करने वालो का है| जिस देश का पढ़ा लिखा वर्ग ऐसा हो उस देश के अनपढ़ अशिक्षित वर्ग को दोष देना बेकार है| यूरोपीय देशो में  साफ सफाई की बात करने वाले आपको हर नगर में गंदगी फैलाते मिल जायेंगे यही नही अगर आपको यकीन न हो तो शाम को कनाट पैलेस के हर एक ब्लाक में आपको यूथ ऐसा करते मिलेंगे ये जगह राजधानी का दिल कहा जाता है| पर जो लोग दिल को ही गन्दा कर रहे है वो बाकी शरीर का क्या हाल करेंगे सोचो !!!
एक लड़की मुसीबत में होती है कोई आगे नही आता फिर जब अगले दिन उस लड़की की फोटो अखबार में छपती है उसकी मौत के बाद उतर जाते है सड़कों पर चिपका डालते है इंडिया गेट पर उसकी फोटो | जला डालते है, सेकड़ों मोमबत्ती, हिला देते है देश की कानून व्यवस्था, लड़ जाते है देश की सरकार से, कह देते है प्रधानमंत्री कुछ नही करता| देश की सरकार से लड़ने वालो पहले खुद से लड़ना सीखो, अपनी कायरता से लड़ना सीखो इस बहादुरी के दिखावे के कीड़े से लड़ना सीखो जो अब तुम्हारी नस-नस में घुल चूका है| अभी कई रोज पहले एक विडियो देख रहा था उसमे एक लड़का कह रहा था की आज हर एक आदमी अपनी प्रोफाइल में तिरंगे की प्रोफाइल पिक लगाना चाहता है, देशभक्ति के स्टेट्स अपलोड करना चाहता है/ इस सिस्टम के प्रति गुस्सा दिखाना चाहता है फेसबुक, व्हाट्सएप्प पर स्वच्छ अभियान चला रहा है, देश से गंदगी मिटाने की बात कह रहा है नारी के सम्मान की रक्षा की बात कह रहा है पर क्या फायदा इस देशभक्ति का जो फेसबुक तक सिमित हो? कुछ लोग देश को हिन्दू राष्ट्र घोषित करने की बात कह रहे है कुछ कह रहे है  मुस्लिम इसी देश में रहेंगे कोई हिन्दुत्व के खतरे की बात कर रहा है कोई इस्लाम को खतरा बता रहा है अफवाहों की पोस्ट डालकर  खुद तो पाश कॉलोनी की 10 मंजिल पर सो जाते है और विडम्बना यह है की ये सोशल मीडिया पर खुद को क्रन्तिकारी कहते है पर इनकी क्रांति का शिकार अक्सर कोई गरीब हिन्दू या मुस्लिम बन जाता है जुल्म की विडियो बना लेते है पर उस जुल्म पर बोलना नहीं चाहते पिक अपलोड करके बता रहे होते है छि! कितना घिनोना कृत्य है कितना गन्दा हमारा समाज है देश को गन्दा बता रहे होते है| भूखे की वीडियो बनाकर पोस्ट पर लिखकर डालते है कि देश में सवेदन्हीनता नही रही कहा गयी सरकार, किसानो का खून चूसने वाले साहूकार और नेता अक्सर किसानो के हित की पोस्ट करते दिख जाते है
यह है भारत का यूथ जो बस भलाई दिखाना तो जानता है पर करना नही चाहता| सोशल मीडिया पर अच्छी बात करेंगे माँ बाप की सेवा करने की बात करेंगे पर खुद के घर में न माँ की सुनते न बाप को बाप मानते दिन भर फेसबुक पर आदर्शो की बात करने वाले शाम को ठेकों और बिअर बार में शराब के लिए लड़ते मिलते है | सभी स्कूल कालेज बच्चों को अनुशासन सिखाने का दंभ भरते है पर ये लोग कहा पढ़कर आते है जो बस, मेट्रो ट्रेन आदि में चढ़ते उतरते धक्कामुक्की करते है सव्चलित सीढियो पर दौड़ कर चलते है? में कई बार सोचता हूँ जिस देश में 95% लोग गैर जिम्मेदार हो उस देश को महान क्यों कहते है ?
राजीव चौधरी

Thursday, 29 October 2015

भगवान पर भ्रम में यूरोप



चर्च ऑफ़ इंग्लैंड और दुनिया में बहुत दिनों से चल रही लैंगिग समानता पर बहस के बीच बिट्रेन के संसद हाउस ऑफ़ लार्डस में बैठने वाली पहली महिला पादरी रेशाल ट्रवीक ने कहा है कि “चर्च ऑफ़ इग्लैंडको भगवान के लिए पुर्लिंग शब्द (HE) का इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए! उन्हौने अपने संम्बोधन में कहा की भगवान का कोई लिंग नहीं होता। अतः उसे स्त्रीलिंग, पूर्लिंग जैसे सर्वनामों से संबोधित नहीं किया जा सकता आपको बताते चले कि रेशाल ट्रवीक चर्च ऑफ़ इंग्लैंड की शीर्ष महिला पादरी है। वैसे देखा जाये तो दुनिया में पहले महिला पादरी नहीं होती थी अब पिछले कुछ सालो में जरुर बनने लगी है। वह बेहद विन्रम भाव से कहती है कि सब कहते है कि भगवान ने हमें अपने जैसा बनाया है। यदि उसने हमें अपने जैसा बनाया है तो उसको पुरुष जैसा ही क्यों देखें? भगवान केवल भगवान है उसको नर या नारी की   तरह नहीं देखा जा सकता। कई अन्य महिला पादरियों ने भी उसकी बात का सर्मथन करते हुए कहा कि  भगवान लिंग से परे है अर्थात उनको स्त्रीलिंग या पुर्लिग का प्रतीक मानकर नहीं पुकारा जा सकता है।

वैसे देखा जाये तो परमात्मा को लेकर दुनिया बहुत भ्रम में जी रही है। और अधिकांश  संसार में नकली भगवान बनाकर उनको पूजनीय बना दिया जाता है या यह कहो कि वो पूजनीय हो चुके है! अब इसाई समाज में ही कभी यीशु को ईश्वर का बेटा तो कभी ईश्वर भी कह दिया जाता है और कभी यीशु को सारे संसार के लोगों का दुख हरने वाला भी कह दिया जाता है। बहरहाल जो भी हो पर रेशाल ट्रवीक के इस संबोधन के बाद ईसाइयों की पवित्र बाईबिल जरुर संदेह की नजरों से देखी जा सकती है क्योकि ईसा ईश्वर है और यीशु उसका बेटा तब  ईश्वर  स्त्री या पुर्लिंग जरुर होगा? बाइबल के अनुसार हव्वा ने सारे ब्रहमाण्ड को 6 दिन में बनाया और सातवें दिन उसने विश्राम किया और वह दिन रविवार था। अब प्रश्न यह है कि विश्राम वो करेगा जिसके शरीर होगा और जिसके पास शरीर है वो 6 दिन में इस दुनिया का निर्माण नहीं कर सकता   यदि 6 दिन में इतना विशाल ब्रहमाण्ड बना सकता है तो बच्चे के निर्माण में 9 माह क्यों लग जाते है, वह तो कुछ सैंकडो में बन जाना चाहिए! इस बात से बाइबल असत्य या मनोरंजक कहानी से भरपूर पुस्तक साबित होती है।

ठीक कुछ-कुछ ऐसा ही हाल कुरान-ए शरीफ का है कुरान में बतलाया गया कि अल्लाह ने दोनों हाथों से आदम को बनाया यदि उसने दोनों हाथो से इंसान को बनाया तो जरुर वो भी स्त्रीलिंग-पुर्लिंग जरूर रहा होगा! क्योकि शरीर के बिना हाथ संभव नहीं है। इससे साबित होता है कि यह भी पुराणों की तरह कल्पित कहानियों का संग्रह मात्र हो सकता है?

अब परमात्मा क्या है? जो कण-कण में विद्यमान है, जो निराकार है, जो सर्वव्यापक है, जो आदि है, जो अनंत, अजन्मा है वही परमात्मा है। यजुर्वेद के चालीसवें अध्याय के अन्त में मंत्र का सार है वेद सब मनुष्यों के प्रति ईश्वर का उपदेश है, कि हे मनुष्यों! जो में यहां हूँ, वहीं सूर्य आदि लोकों में हूँ, सर्वत्र परिपूर्ण आकाश के तुल्य व्यापक मुझ से भिन्न कोई बडा नहीं है में ही सबसे बडा हूँ,  में ही छोटा मेरा निज नाम ओ3म है अतः अविद्या का विनाश  कर आत्मा का प्रकाश करके शुभ गुणकर्म स्वभाव वाला बन।,, अब जो लोग ईश्वर को नर या नारी समझकर इस बारे में संशय में है उन्हें एक बात और पता होना चाहिए कि जीवात्मा, परमात्मा और प्रकृति  इन सबका कोई लिंग नहीं होता। वेदों ने तो मनुष्य को भी कहा है की न तू कुमार है, न तू कुमारी है न तू स्त्री है न तू पुरुष है, यह बाहर का ढांचा ही स्त्री पुरुष है अन्यथा आत्मा कोई नर या नारी नही है|  जो सर्वव्यापक है, उसे शरीर से नहीं जोडा जा सकता अतः रेशाल ट्रवीक जी आपने जो कुछ अब कहा वो हमारे ऋषि मुनि करोडों साल पहले कह गये कि ईश्वर एक व्यवस्था का नाम है जो अनादि है सूक्षम इतना कि कण-कण में समा जाये और विशाल इतना कि हर पल एहसास करा जाये फिर भी आपको अपना और अपने लोगो का संशय पूर्णरुप से मिटाने के लिए वेंदो की और लौटकर सच्चे ईश्वर को जाना जा सकता है।

राजीव चौधरी


Saturday, 24 October 2015

भारत में इन्सान नही मरता



पंचतंत्र की कहानी में एक बात आती की शासन के समर्थक को जनता पसंद नहीं करती और जनता के पक्षपाती को शासन। इन दोनो का प्रिय कार्यकर्ता दुर्लभ है। आज भारत के हालात भी कुछ-कुछ ऐसे ही हो गये है| आज मीडिया तो बिना विवाद वाला बयान नही सुनती, और राजनेता बिना विवाद वाला बयान नही देते| इसके बाद जो कुछ बचता है उसे हम लोकतंत्र कहते है जिस पर विश्वास कर आस्था रख कर हम जीवन जीते है
आज मुस्लिम राजनेता कह रहे है, भारत में मुस्लिम के हित सुरक्षित नहीं है! और हिन्दू राजनेता कह रहे है, हिन्दुओं के हितों की परवाह नही हो रही है | सेकुलर तबका हर जगह मुहं मार रहा है, देश में एक अजीब किस्म का शोर मचा है “सच कहूँ तो कई दिन से टीवी ऑन करने से भी डर लगने लगा है|” -क्या सुने ? बीफ बीफ बीफ या विवादित बयान ऐसा लगता है थोड़ी देर यदि और टीवी देख लिया तो किसी मामले में मीडिया हमको न लपेट दे| वैसे गली में सब ठीक है, दरवाज़े पर कुर्सी डाल कर जब बेठ जाता हूँ बड़ा सुकून मिलता है, मालदीन शेख की बूढी माँ से बात करता हूँ,, गली में खेलते उसके पोते उनके साथ खेलते मोह्हले के अन्य बच्चे अच्छे लगते है! कोई साम्प्रदायिक और धर्मनिरपेक्ष खेल नही बस वो खेल जिससे वो बचपन मानवता में जीता है| देखकर लगता है मेरा देश विश्व के सब देशो में महान है| पर जैसे ही भीतर जाकर टीवी चलाया अचानक एक शोर कानो में गूंजता है जैसे देश में  धर्मनिरपेक्ष बाढ़ आ गयी और उससे बचने को साम्प्रदायिक नावों मे सवार हुआ जा रहा हो! किसी का धर्म खतरे में घायल है, “तो किसी की गौ माता रहम की भीख मांग रही है|,, सबसे बड़ी बात पिछले कुछ सालो से हमारे देश में इन्सान मरने बंद हो गये यदि कोई मरता है, या तो वो मुस्लिम या हिन्दू होता है, या फिर दलित होता है आदिवासी मरता है, या सेना का जवान शहीद होता है| किसी अच्छे सज्जन इन्सान को 3 घंटे टीवी के सामने बैठा कर न्यूज़ चेनल दिखा दो वो भीतर से जब बाहर आयेगा तो वो मनुष्य नही होगा या कट्टर हिन्दू होगा या मुसलमान वो मनुष्य नही रहेगा यदि वो मुस्लिम है तो वो शिया हो जायेगा या सुन्नी हो जायेगा| हिन्दू है तो दलित हो जायेगा या स्वर्ण हो जायेगा नही तो आरक्षण का भाला लेकर पक्का सड़क पर निकल पड़ेगा| साहित्यकार कह रहे है, देश का माहोल ख़राब है, राजनेता कह रहे है देश टूटने की कगार पर खड़ा है| इसके बाद बचता है सोशल मीडिया उस पर इससे भी बुरा त्राहिमाम मचा है फेसबुक पर मेरे बहुत सारे विदेशी मित्र भी जो अपने देश की कला, संस्कृति पर्यटन आदि का दिखावा करते है सुन्दर पोस्ट डालकर अपने देश में में घुमने को आमंत्रित करते है या फिर अपने मनोभाव डालकर अपनी भावनाए शेयर करते है पर जब में अपने देश के लोगो को देखता हूँ तो बड़ा अजीब लगता है कोई देश बचा रहा है किसी की जात की इज्ज़त का सवाल है कुछ मोदी से जबाब मांग रहे है तो कुछ मोदी की तरफ से जबाब दे रहे है कोई महंगी दाल को लेकर रो रहा है तो कुछ उसे कमेन्ट बॉक्स में 6 रूपये किलो के बेंगन खाने की सलाह दे रहे है कोई बता भारत को विकास के पथ का सारथि बता रहा है तो कोई किसानों की आत्महत्या का सवाल लिए सरकार को घेरे बैठा है कोई हिन्दू की लाश के लिए न्याय मांग रहा है तो कोई मुस्लिमो की सुरक्षा को लेकर भयभीत है, हर कोई एक दुसरे को दोषी ठहरा रहा है कुछ लोग इनसे हटकर गजल और शायरी में मस्त है|
मीडिया से बाहर आकर देखता हूँ तो सब कुछ सामान्य है हिंसा अहिंसा 125 करोड़ की आबादी के देश में होना आम बात है कहीं प्रशासन ठीक से काम नही करता तो कहीं उसे काम करने से रोक दिया जाता है राजनेताओ की वोट लीला और कुछ मीडिया वर्गों की नोट लीला के बीच फंसा देश का नागरिक सोच अब देश को छोड़ सिर्फ अपने हितो की रक्षा के बारे में विचार कर रहा है क्योंकि राजनीती अपने कर्तव्यो को भूलकर बयानबाजी में लगी है इस सारे शोर से जब थक जाता हूँ तो सोचता हूँ की आखिर सीमा पर बैठा वो बूढी माँ का इकलोता बेटा किसके लिए लड़ रहा है किसके लिए मर रहा है??    
राजीव चौधरी      

Tuesday, 20 October 2015

आखिर पाकिस्तान किसका दुश्मन है?



मैंने अभी कई दिन पहले ही आत्म विष्लेशण किया तो लगा कि देश  में हो रही तमाम घटनाओं को पढ़-पढ कर मेरे भीतर का मनुष्य  कमजोर होने लगा है। और में स्वयं को मनुष्य की मानने बजाय एक सच्चा भारतीय मानने की राह पर चल पडा हूँ ! जबकि में दिन में तीन चार बार सर्व कल्याण मन्त्र सर्वे भवन्तुः, सर्वे सन्तु निरामया को पूरे मनोयोग से दोहराता रहता हूँ
9 अक्टूबर को शिवसेना की धमकी के बाद पाकिस्तानी गजल गायक गुलाम अली का शो रदद हो गया जिसे कुछ लोगों ने कला का अपमान कहा तो किसी ने अथिति देवो भव: जैसी हमारी संस्कृति का अपमान|  जिसकी मीडिया में  भी शिवसेना की काफी आलोचना हुई थी। लेकिन गायक कलाकार अभिजीत ने इस मामले पर कहा कि इन बेशर्मो को कितनी बार भगाया है। लेकिन इन्हें थोडी भी शर्म नहीं आती है। इनके पास आत्मसम्मान नाम की कोई चीज़ नहीं है। अभिजीत ने  गुलाम अली के खिलाफ कहा है कि इन लोगो के पास   सिर्फ आतंकवाद है और हम अपने देश में इन्हें  पाल रहे है। पर सिने अभिनेता नसरुददीन शाह ने इस मामले पर दुख जताते हुए कहा कि इस घटना से में बहुत शर्मिंदा हूँ क्योंकि जब में लाहौर गया था तो मेरा बहुत शानदार स्वागत किया गया था। हालाकि भारत और पाकिस्तानी कलाकारो का एक दूसरे के यहां  आना जाना लगा रहता है। राजनेता और मीडिया भी खबरों के अलावा आपसी संवाद स्थापित करते रहते है। क्रिकेटर भी मैच के बाद या कमेंटरी रुम में अच्छा वार्तालाप करते है। कभी कोई हिंसा नहीं करते है। अब अन्य प्रतिभाओं को देखे तो सानिया मिर्जा ने पाकिस्तानी क्रिकेटर से निकाह किया और भारत की आतंक की फेक्ट्री कहे जाने वाले दाऊद इब्राहिम ने अपनी बेटी का हाथ पूर्व पाक क्रिकेटर जावेद मियांदाद के बेटे के हाथों में सोपा। उधोगपति और व्यापारी भी अपने हितोनुसार आते जाते और मिलते रहते है। अब इस सारे प्रसंग पर गौर करने बाद कई सारे प्रश्न जन्म लेते है कि जब राजनीति, कला, खेल,व्यापार आदि की पाकिस्तान के साथ कोई दुश्मनी नहीं है तो पाकिस्तान का हिन्दूस्तान में दुश्मन कौन है, वो रोजाना सीज फायर तोड़ भारतीय सेना के जवानों को क्यों मारता है क्या इन जवानों  की भारत के अन्दर कोई बड़ी  महत्वाकाक्षीं परियोजना चल रही है, जिसे हथियाने के लिये वो उन्हें मारता है ?  या फिर ऐसा हो सकता है की सडक के किनारे बैठा कोई गरीब उसका दुश्मन हो  या सीमा के नजदीक खेलता मासूम बचपन जो रोज उनकी अचानक हुई गोलाबारी का शिकार होता है! बाजारों में सामान खरीदते लोग बम विस्फोट में उनके शिकार होते है, होटलो में हुऐ हमलो में लोग मरते है क्या यह सब लोग पाकिस्तान के दुश्मन है?  पर इन सबने पाकिस्तान का क्या बिगाडा? और जब कलाकारो, व्यापारियों, खेल जगत, राजनीती और मीडिया में  से पाकिस्तान का कोई दुश्मन नहीं है तो दुश्मन कौन है? क्यों आतंकी हमले होते है? क्यों रोजाना सीमा पार से सीजफायर टूटते है आखिर दुश्मनी का मापदंड क्या है?
न तो मैं राजनीतिज्ञ हूँ, न कोई बड़ा विचारक या समाज सुधारक परन्तु फिर भी स्थितियों का विश्लेषण करने की मेरी सीमित योग्यता के चलते मैं इस नतीजे पर पहुंचा हूँ कि पाक मुसलमानों को हिन्दुओं के खिलाफ भडकाकर उनके विकास को अवरुद्ध किया जाता रहा है, जिसके वो सदैव हकदार रहे है। चाहें वो हिन्दूस्तान के हो या पाकिस्तान के हो। मुझे लगता है कि कुछलोगों को लगता रहा है कि यदि मुस्लिम पढ़ लिखकर समझदार और सम्पन्न हो गये तो हिन्दुओं की तरह वह भी किसी एक पार्टी के नहीं रह जायेगें अपनी बुद्धि से काम लेकर अपने हितो के विषय में निर्णय लेने लगेंगे मेरी सभी लोगों से प्रार्थना है कि षड़यंत्र को समझें जो बडी तरकीब से चलाया जा रहा है। पाकिस्तान में हमेशा से हिंदुस्तान का भय दिखाकर सत्ता की कुर्सी पर बैठा जाता रहा है|
इसी तरह भारत में भी धर्मनिरपेक्षता की आड़ में कुर्सी का खेल चलता है जिस तरह कलाकार अपनी कला बेच रहे है उसी तरह राजनीति और मिडिया का एक हिस्सा भी अपनी खबरे बेचकर पैसे कमा रहे है। गुलाम अली का शो रदद होना कोई इतना बड़ा अपराध नही की उसमे देश के प्रधानमंत्री को लपेटा जाये इसके बाद अभिजीत ने जो कहा वह उसकी देश के प्रति आस्था को जताता है उसने कला से पहले देश को सम्मान दिया हो सकता है उसके अन्दर शहीद हुए जवानों के परिवारों के प्रति प्रेम जागा हो आखिर जो लोग सीमा पर बैठकर हमारे हितो की रक्षा करते है क्या हम उनके हित के लिए दो शब्द भी नही कह सकते ! जब हिन्दुस्तान के मुस्लिम राजनेता सलमान रुश्दी के जयपुर साहित्य सम्मेलन में आने का विरोध कर सकते है तो शिवसेना और अभिजीत ने गुलाम अली का विरोध करके कोई पाप अनाचार नहीं  किया इनके अन्दर भी देश प्रेम की भावना हिलोरे मार सकती है क्योंकि जिस देश से यह कलाकार आते है उसी देश से हमारे यहाँ आतंक भी आता है जो हमारी कला, धर्म-संस्कृति, पूजीं हमारे सम्मान के रखवालों की रात को गर्दन काटकर सिर ले जाता है| और इन सिरों की उनके देश में बोली लगती है  तब यह पाक गजल कलाकार इन  इनके क्रिकेटर इन कायराना कुकृत्यों पर दो लाईन नहीं बोलते पर यहां आकर अपनी गजल, शायरी बेचकर पैसा और शोहरत बटोर ले जाते है। अबकी बार जब यह लोग आये तो इनसे एक बात पूछ लेना कि यहां पाकिस्तान का दुश्मन कौन है?
राजीव चौधरी