अभी पिछले कुछ दिन पहले की बात है, राजीव चौक गेट नम्बर 7 से आगे पालिका बाजार
के सामने एक आदमी चाय पी रहा था उसने चाय पीने के बाद प्लास्टिक कप को बराबर में
फेंक दिया उसके बाद जेब से सिगरेट की डब्बी से सिगरेट निकलकर उसे खाली कर फेंक
दिया मैने उसे कहा की आप कूड़ा क्यों फैला रहे हो इसे डस्टबीन में भी डाल सकते हो?
तो उसने कहा में हाइकोर्ट में वकील हूँ ये काम मेरा नहीं है ये काम सफाई करने वालो
का है| जिस देश का पढ़ा लिखा वर्ग ऐसा हो उस देश के अनपढ़ अशिक्षित वर्ग को दोष देना
बेकार है| यूरोपीय देशो में साफ सफाई की
बात करने वाले आपको हर नगर में गंदगी फैलाते मिल जायेंगे यही नही अगर आपको यकीन न
हो तो शाम को कनाट पैलेस के हर एक ब्लाक में आपको यूथ ऐसा करते मिलेंगे ये जगह
राजधानी का दिल कहा जाता है| पर जो लोग दिल को ही गन्दा कर रहे है वो बाकी शरीर का
क्या हाल करेंगे सोचो !!!
एक लड़की मुसीबत में होती है कोई आगे नही आता फिर जब अगले दिन उस लड़की की फोटो
अखबार में छपती है उसकी मौत के बाद उतर जाते है सड़कों पर चिपका डालते है इंडिया
गेट पर उसकी फोटो | जला डालते है, सेकड़ों मोमबत्ती, हिला देते है देश की कानून
व्यवस्था, लड़ जाते है देश की सरकार से, कह देते है प्रधानमंत्री कुछ नही करता| देश
की सरकार से लड़ने वालो पहले खुद से लड़ना सीखो, अपनी कायरता से लड़ना सीखो इस
बहादुरी के दिखावे के कीड़े से लड़ना सीखो जो अब तुम्हारी नस-नस में घुल चूका है|
अभी कई रोज पहले एक विडियो देख रहा था उसमे एक लड़का कह रहा था की आज हर एक आदमी
अपनी प्रोफाइल में तिरंगे की प्रोफाइल पिक लगाना चाहता है, देशभक्ति के स्टेट्स
अपलोड करना चाहता है/ इस सिस्टम के प्रति गुस्सा दिखाना चाहता है फेसबुक,
व्हाट्सएप्प पर स्वच्छ अभियान चला रहा है, देश से गंदगी मिटाने की बात कह रहा है
नारी के सम्मान की रक्षा की बात कह रहा है पर क्या फायदा इस देशभक्ति का जो फेसबुक
तक सिमित हो? कुछ लोग देश को हिन्दू राष्ट्र घोषित करने की बात कह रहे है कुछ कह
रहे है मुस्लिम इसी देश में रहेंगे कोई
हिन्दुत्व के खतरे की बात कर रहा है कोई इस्लाम को खतरा बता रहा है अफवाहों की
पोस्ट डालकर खुद तो पाश कॉलोनी की 10
मंजिल पर सो जाते है और विडम्बना यह है की ये सोशल मीडिया पर खुद को क्रन्तिकारी
कहते है पर इनकी क्रांति का शिकार अक्सर कोई गरीब हिन्दू या मुस्लिम बन जाता है
जुल्म की विडियो बना लेते है पर उस जुल्म पर बोलना नहीं चाहते पिक अपलोड करके बता
रहे होते है छि! कितना घिनोना कृत्य है कितना गन्दा हमारा समाज है देश को गन्दा
बता रहे होते है| भूखे की वीडियो बनाकर पोस्ट पर लिखकर डालते है कि देश में
सवेदन्हीनता नही रही कहा गयी सरकार, किसानो का खून चूसने वाले साहूकार और नेता
अक्सर किसानो के हित की पोस्ट करते दिख जाते है
यह है भारत का यूथ जो बस भलाई दिखाना तो जानता है पर करना नही चाहता| सोशल
मीडिया पर अच्छी बात करेंगे माँ बाप की सेवा करने की बात करेंगे पर खुद के घर में
न माँ की सुनते न बाप को बाप मानते दिन भर फेसबुक पर आदर्शो की बात करने वाले शाम
को ठेकों और बिअर बार में शराब के लिए लड़ते मिलते है | सभी स्कूल कालेज बच्चों को
अनुशासन सिखाने का दंभ भरते है पर ये लोग कहा पढ़कर आते है जो बस, मेट्रो ट्रेन आदि
में चढ़ते उतरते धक्कामुक्की करते है सव्चलित सीढियो पर दौड़ कर चलते है? में कई बार
सोचता हूँ जिस देश में 95% लोग गैर जिम्मेदार हो उस देश को महान क्यों कहते है ?
राजीव चौधरी