इतिहास साक्षी है, भारत स्वार्थ और दंभ का सबसे
बड़ा मंच है, गंदी राजनीती में पहले कुछ राजाओ के और अब कुछ नेताओ का खून इस कदर सन चूका है जिसे साफ नही किया जा
सकता कारण इस देश का मनोविकार ही कुछ ऐसा है जिसे समझने के लिए इतिहास की मानसिकता
समझनी होगी; “ सबसे पहले में ये बता दूँ की जो लोग आज हर एक मुद्दे में मोदी को
लपेट रहे है ये वो ही लोग है जो जरासंध की सेना में शामिल हो कृष्ण की नगरी मथुरा
पर आक्रमण करने आते थे,, क्योंकि इनकी नजरो में कृष्ण ग्वाला था, और भला ग्वाला किसी देश का राजा
कैसे हो सकता है! भारत में तो हमेशा से त्याग पूजा जाता है| भारत के अधिकांश राजा
और भगवान अमीरों के घर पैदा हुए जो गरीब के घर पैदा हुआ वो नकार दिया गया क्योंकि
गरीब के पास त्याग को कुछ नही होता अमीर के पास सब कुछ होता है | कबीर गरीब घर
पैदा हुआ नकार दिया गया महावीर अमीर घर में पैदा हुआ भगवान बना, बुद्ध राजा के घर
पैदा हुआ भगवान बना , जैनों के २४ तीर्थकर अमीरों के घर पैदा हुए सब भगवान बने
क्योंकि उनके पास त्याग था यहाँ त्याग की परिभाषा सिर्फ और सिर्फ धन दौलत पद को
माना जाता है अभी पिछले साल दिल्ली में चुनाव हुए तो केजरीवाल को भी त्यागी बताया
गया की इसने बड़ी नोकरी त्याग दी इसलिए इसे मुख्यमंत्री बना दो और विडम्बना देखो बन
भी गया | आचार्य चाणक्य भारत की इस मनोवृति को ताड गया था उसने चन्द्रगुप्त को कहा
जब त्याग को महत्व जयादा मिलता हो तो किसी से इतना छीन लो कि त्याग करने योग्य बन
जाओ और चन्द्रगुप्त ने गुरु के आदेश का पालन कर मगध पर हमला किया धनानंद से सत्ता
छीन ली| और चन्द्रगुप्त ने भारत को वो नक्शा दिया जिसे देश आज भी सोने की चिड़िया
कहता है खेर लम्बी बात न कर असली बात पर आते है आज पाकिस्तान ३ हिस्सों में बटने
को खड़ा है ईरान, अफगानिस्तान भारत के साथ है विश्व के बड़े बड़े देश हिंदुस्तान की
तरफ नजर गड़ाये बैठे है धीरे-धीरे भारत का सितारा बुलंद हो रहा है कारण ये कोई मोदी
का जादू नही है काम करने वाले लोग आज भी वो ही है जो पहले थे बस अंतर इतना हुआ की
काम को करवाने वाला बदला गया पर यह बदलाव जयचंदों से देखा नही जा रहा है क्योंकि
वो ही मानसिकता कि बिना त्याग के एक चाय वाला राजा कैसे बना और ये लोग कांग्रेश के
त्याग के किस्से सुनाने लगे खुद राहुल ने भी कहा मेरी दादी मार दी गयी मेरे पिता
की हत्या हुई हमारा इस देश के लिए बड़ा त्याग है अत: राजा मुझे बना दो पर मुझे लगता
है जितने भी लोग इस देश में त्याग के नाम पर स्वीकार किये उन्होंने इस देश के धर्म
और मान को चकनाचूर किया कृष्ण ने त्याग नही किया था कंश से सत्ता को छीना था बदले
में हमें गीता जैसा ग्रन्थ मिला चन्द्रगुप्त मोर्य ने कोई त्याग नही किया था बदले
में हमें ईरान तक भारत की सीमा मिली थी मोदी ने त्याग नही किया देश के लोगो को
विश्वाश है कुछ अच्छा ही मिलेगा पर इन सत्ता के भूखे जयचंदों को सत्ता की नटनी
नचाने कोन रोकेगा? ये हर रोज देश में जरा जरा से मुद्दों पर मीडिया के माध्यम से
जो लोगो को गुमराह कर सत्ता पाने के लिए अपनी राजनीती की नटनी नचा रहे है इन्हें
कोन रोकेगा ? अब सच ये है जिसके अन्दर राजनीतिक महत्वआकांशा नही है उनके हिसाब से
देश ठीक गति पकड़ रहा है पर जो सत्ता का नृत्य देखना चाहते है वो कुछ भी कहकर बकवाश
कर सकते है ....राजीव चौधरी
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