“मत पूछो जन्नत की हकीकत मित्रो सभी शैतान फ़रिश्ते बनकर बैठे
है!” यह कोई राजनीति से प्रेरित
कथन नही और न किसी राजनैतिक दल पर आरोप व हमला। बल्कि ये मात्र उस खतरनाक भविष्य का दर्पण है जिसमें
देश स्पष्ट रुप से जलता दिखाई दे रहा है। पाकिस्तान कहता है कि हमारे पास 100 परमाणु बम है जो भारत को तबाह करने के लिए प्रयाप्त पर में कहता हूँ जब तक भारत में जातिवाद की राजनीति है या
जातियों को बाटकर देश में शासन करने के वाले नेता है भारत को तबाह होने के लिये
पाकिस्तान के परमाणु बमो की जरुरत नही है। ये तो खुद ही इस जातिवाद की आग में जलकर
राख हो जायेगा।
बहुत पहले मैने पढा था
कि संविधान सभा की बहस में महावीर त्यागी समेत कई नेताओ ने आरक्षण की अवधरणा का
विरोध किया था। तब सरदार पटेल ने बहस हिस्सा लेते हुए कहा था कि सिर्फ ज्यादा
सहूलियत देकर अनुसूचित जाति और जन जाति को समाज की मुख्यधारा में लाना मुश्किल है।
इसके लिये देश में जागृति लानी होगी। उन्हौने गुलामी का उदाहरण देते हुए तर्क रखे
थे कि दास -पृथा से छुटकारा किसी तरह के आरक्षण से नही मिला था बल्कि समाज में
जागरुकता लाकर उस अमानवीय पृथा को खत्म किया गया। बाल विवाह के खिलाफ आर्य समाज के
द्वारा फैलाई गयी जाग्रति से ही और कुछ कानून से पृथा बंद हो पाई थी। पटेल जी का
मानना था कि लोकतंत्र के मजबूत होने और जागरुकता से जातिवाद का नासूर खत्म हो
सकेगा। सब जानते है कुछ पृथाए समाज में ऐसी थी जिनसे पूरा विश्व ग्रस्त था। जिनमें
भारतीय समाज तो आज भी ग्रस्त है। हालाकि धीरे-धीरे लोग समाज के मिथक तोडकर आगे बढ
रहे है किन्तु कुछ लोगों को नहीं भाता और समाज में जातिवाद का गरल घोल देते है
जिससे देश और समाज की आपसी तालमेल की नसे कमजोर हो जाती
है। मेरा मानना है जो पहले कमजोर था उसका उस समय के ताकतवर ने उसका शोषण किया और
जो आज मजबूत बनेगा वो कल के कमजोर का शोषण करेगा। इसिलये क्यों ऐसे काम किये जाये
कि यह जातिगत तनाव ज्यों का त्यों बना रहे, एक दूसरे का हक मारकर समाज का उत्थान नही होता समाज का शिक्षा में समानता और
जाग्रति से होता है। अब यह सरकारो को सोचना होगा कि आरक्षण को बढावा देने के बजाय
इसे धीरे-धीरे समाप्त करना ही देशहित
में होगा देश के सभी वर्गों का समान विकास
सुनिश्चित करने के लिये रोजगार के अवसरो का सृजन और पिछडे लोगों को मुख्यधारा में लाने के लिये आरक्षण का आधार
सिर्फ गरीबी होना चाहिये
जिस देश का पढा लिखा २३ साल का नौजवान आरक्षण की बैसाखी पाने को लड रहा
हो! गोलियां खा रहा हो,सार्वजनिक, सरकारी सम्पति में आग लगा रहा हो,उस देश के लिये सुपरपावर बनने का सपना बेमानी है। खैर भारत में लगी आरक्षण की
आग से यूरोपीय देश बडें प्रसन्न है क्योंकि वो जानते है कि आरक्षण की मार सें सुपर
प्रतिभाएं भारत से जितना पलायन करेगी उससे उन देशों को पावरफूल बनायेगी । अब फैसला
हमे करना है जाति के नाम पर बटकर अपना घर जलाना है या एकजूट होकर विश्व विजय करनी
है।
राजीव चौधरी
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