5 अक्तटूबर के समाचार पत्र में दो खबर ऐसी थी की जिसे पढ़े बिना नही रहा गया एक तो यह कि दिल्ली के रेड लाईट एरिया से तीन नाबालिग
बच्चियां छुड़ाई गयी दूसरी खबर थी की दिल्ली के रेड लाइट एरिया में 1.68 लाख कंडोम
फ्री वितरित किये गये | खबर थी की कंडोम
की कमी पर दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाती मालीवाल ने त राष्ट्रीय एड्स
नियत्रंण संगठन (एनएसीओ) से राजधानी के रेड लाईट इलाकों को लेकर विस्तृत रिर्पोट
मांगी और कंडोम आपूर्ति को लेकर तत्काल आधार पर बहाल करने के लिये कहा।
अब में पहले आपको बता दूँ
महिला आयोग का गठन क्यों और किस लिये हुआ था ताकि यह लेख भ्रामक व् अश्लील न लगे
देश में महिलाओं को सशक्त बनाने, महिलाओ के हितों की देखभाल व उनका सरंक्षण करने, महिलाओं के प्रति भेदभाव मूलक व्यवस्था खत्म करने, उनकी गरिमा व सम्मान सुनिश्चित करने महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों एवं अपराधों पर त्वरित कार्यवाही करने के
लिये देश में महिला आयोग का गठन किया था। न कि उनके जिस्म को नोचनें वाले लोगों के
लिये कंडोम उपलब्ध कराने के लिये। स्वाती मालीवाल ने एनएसीओं को लिखे पत्र में कहा, जीबी रोड इलाके अपने दौरे के दौरान
मुझे मालूम हुआ कि सेक्स वर्कर्स को पिछले कई महिनों से सरकार की तरफ से कंडोम
नहीं मिल रहे हैं। अतः सरकार की तरफ से उन्हें 12 लाख कंडोम मुफ्त दिये जाये। अब प्रश्न यह कि गरीब जनता की कमाई को सरकार 12 लाख कंडोम के रुप में अय्यासी के अडडों पर मुफ्त क्यों दे रही है, दूसरा आखिर सरकार कौन से बजट से रेड लाईट
एरिया में अय्यासी के लिये यह सुविधा
प्रदान कर रही है ? जबकि बगैर कानूनी मान्यता के पुरे देश में यह कारोबार धडल्ले
से चल रहा है। कहीं महिला आयोग कंडोम की आड़ में इस अवैध कार्य के प्रोतसाहन का
कार्य तो नहीं कर रही है ? देश में आज कुल 11 सौ 70 रेड लाईट एरिया है जिनमें प्रतिवर्ष हजारो बच्चियां
कारोबार के लिये धकेल दी जाती है। और दूसरी बात यह है कि महिला आयोग का गठन
महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा के लिये
किया गया था न कि देह व्यापार को बढावा
देने कि लिये। महिला आयोग की अध्यक्ष को कंडोम की कमी तो दिख गयी पर वहां जबरन देह व्यापार में धकेली गयी मासूम लडकियां
दिखाई नही दी ? क्या महिला आयोग 12 लाख कंडोम वितरित कर 12 लाख बलात्कारियों को बुलावा नहीं भेज रही है ? चलो मेंने मान भी लिया कि महिला आयोग को इन देह व्यापार कर
रही महिलाओं की चिंता है पर ये चिंता तब अच्छी लगती जब महिला आयोग इन नरक की
जिन्दगी जी रही महिलाओं के रोजगार और पूर्नवास की व्यवस्था कर इन्हें समाज की
गरिमामयी मुख्य धारा में जोड़नें काम करती। न कि कंडोम की पैरवी करती न जाने हर
साल वेश्यावर्ती के नाम पर कितनी मासूम इस नरक में धकेल जाती है, उनके धर्म
परिवर्तन होते है, खाडी देशो में तस्करी कर इन मासूसों के जिस्म नोंचने के लिये भेजा जाता है। अच्छा होता
यदि महिला आयोग उनके उस मौन दर्द को समझ पाती जो चंद सिक्को की आड में भूख और
गरीबी में अपना तन इन सामाजिक कीड़ों के हवाले करना पडता है | अर्थ लाभ के लिये
स्थापित यौन संबध वेश्यावृति कहलाता है जिसमें भावनात्मक तत्व न के बराबर होता है
। अच्छा तब होगा जब महिला आयोग उन महिलाओं की भावना समझकर उनके लिये कल्याण कारी
कार्य करती जिससे समाज में उन्हैं उचित स्थान मिले और महिला आयोग उन महिलाओं के भी
उत्थान की बात करती जो पूर्वोत्तर राज्यों डायन कहकर मार दी जाती है, उनके बारे में भी सोचती जिन्हें इस आधुनिक काल में भी अंधविश्वास के नाम पर
नग्न घुमाया जाता है। महिला आयोग का काम महिलाओं का सशक्तिकरण करना है न की देश के
लोगों का पैसा कंडोम पर खर्च कराकर अय्याशी को बढावा देना
राजीव चौधरी
No comments:
Post a Comment