यूँ तो चरित्र और संस्कार की कोई स्थाई परिभाषा दक्षिण एशिया में नहीं हैं यदि लोगों के जेहन का फाटक खोलकर देखें तो न जाने
क्या-क्या निकलेगा. अभी देखा “वीरे दी वेडिंग” को लेकर इस समय सोशल मीडिया और इंटरनेट पर बवाल मचा हुआ है. सबसे ज्यादा चर्चा फिल्म के विवादित सीन
को लेकर है, जिसमें स्वरा भास्कर मास्टरबेशन अर्थात (हस्तमैथुन) करती दिख रही हैं.आलोचकों का कहना है कि पद्मावती
के दौरान स्वरा ने औरत को मात्र योनि समझने और संस्कार पर भाषण क्यू
पेला था और अब वो खुद क्या कर रही
हैं.
बस यही से हंगामा खड़ा हो गया कि अपने हाथों से कैसे और सबके सामने क्यों? कुछ इसे सॉफ्ट पोर्न कह रहे है तो कुछ स्वरा के पिछले कुछ बयानों को लेकर पहले से ही नाराज थे. क्या ऐसा हो सकता है सब एक
जैसा सोचे? शायद नहीं! बस यही से विवाद खड़ा होता है. सबसे पहले हमें ये सोचना होगा कि स्वरा कोई आध्यत्मिक गुरु नहीं है ना ही उसके पास
सांस्कृतिक गतिविधियों पर नजर रखने का कोई मंत्रालय. वो एक सिने अदाकारा है जिसे अपनी कलाकारी, निर्माता निर्देशक का नजरिया और एक कहानी पर्दे पर बेचनी होती है. अब लोग क्या सोचते है शायद ये परवाह उसको नहीं होगी वह सिर्फ इतना सोचती
है कि आगे कैसे बढ़ा जाये.
कल यदि कोई निर्माता निर्देशक स्वरा से कहेंगा कि बड़े बजट और बड़े सितारों के साथ उसे सत्यवान-सावित्री फिल्म में
सावित्री का रोल अदा करना है तो जरुर करेगी! क्योंकि वो उसका काम हैं. फिर याद दिला दूँ वो सिर्फ एक अदाकारा है. आप ट्रोल का लठ लेकर खड़ें हो जाइये या
गलियों के गट्ठर या फिर कोई संस्कार
चालीसा उसकी सोशल मीडिया की वाल पर फेंक आईये उसे कुछ फर्क पढने वाला नहीं है. बस इतना होगा आपकी कॉन्ट्रोवर्सी
से उसकी फिल्म का प्रचार अच्छा होगा यही स्वरा क्या सभी कलाकार चाहते
भी है. यदि आपका मानना है कि
मास्टरबेशन एक सामान्य प्रक्रिया है तो स्वीकार कीजिये ट्रोल भी
एक सामान्य प्रक्रिया है.
हाँ जो लोग आज मास्टरबेशन को नारी सशक्तिकरण या नारी की आजादी से जोड़ रहे है शायद वो गलतफहमी या
आत्ममुग्धता में जी रहे है क्योंकि ये किसी इन्सान के निजी पल होते है उनको सार्वजनिक रूप से लोगों के सामने परोसना कोई सशक्तिकरण नहीं है. यदि है तो फिर
महिला अधिकारों, उनके आरक्षण उनकी सामाजिक समानता की बात करना बेमानी है. करने दो हस्तमैथुन देखते है इससे कितना सशक्तिकरण होता है.
एक सवाल ये भी है कि मास्टरबेशन पर खुलकर बात होनी चाहिए या नहीं? मेरे ख्याल से हर किसी के निजी जीवन और सामाजिक जीवन के बीच एक बहुत पतला सा महीन जिसे संस्कार कह सकते है उसका पर्दा होता है
जिसे उठाकर सार्वजनिक करना सही
नहीं होगा. फिल्म के निर्माता निर्देशक तो पैसा कमा लेंगे पर आम समाज को इससे क्या मिलेगा? कौन चाहेगा किसी की बहन बेटी या भाई पुरे परिवार के सामने ये कहे की वो मास्टरबेशन कर रहा है या करने
जा रहा है?
चलो ये फिल्म है ये क्या सन्देश देती है और समाज इससे क्या सीख लेता है, यह तो लोगों के ऊपर निर्भर करता है. लेकिन फिल्म के
माध्यम से महिला समाज को सन्देश
देने वाली इस फिल्म की सभी अदाकारा में कुछ विवाहित है और उनकी कोशिश यही होगी कि उनका रिश्ता भारतीय परम्पराओं के
अनुसार ही निभे, उनके निजी पल सार्वजनिक न हो. किन्तु इसके विपरीत मीडिया और कथित नारीवादी लोग ये दिखाने की कोशिश में लगे हुए है कि शादी-विवाह, बच्चें, रिश्ते-नाते हमारी
सामाजिक परम्पराए सब बकवास चीज है. एक महिला को इन सबसे बचना चाहिए. पर कब तक ये उन्हें भी नहीं पता!
कुछ इसी माध्यम से नारी स्वतन्त्रता के नाम पर उसके असली आन्दोलन को भटकाया जा रहा है जैसे गाली, शराब और सेक्स आज के नारीवाद के अहम बिंदु बना दिये गए हैं जिनके बिना आज की नारी मॉडर्न और आजाद हो
ही नहीं सकती. जहाँ आज एक महिला
को जो अभी भी शिक्षा, समाज में अपने अधिकारों के लिए जंग कर रही है उसे ये सिखाया जा रहा है कि सोशल मीडिया पे
आकर बताएं कि उसे मासिक धर्म कब आता
है. क्या ये जागरूकता है.?
निजता, समाज और जीवन का अभिन्न हिस्सा होती है! मुझे नहीं
लगता हमारे देश के गाँव देहात या शहरी मध्यम वर्ग की लड़कियों और
महिलाओं को इस नारीवाद से कुछ लेना
देना होगा? वो सिर्फ इतना सोचती है कि आवारा लड़कों की वजह से उसकी शिक्षा प्रभावित न हो, बिना दहेज दिए ससुराल ठीक मिल जाये, उसका पति उसे अपने बराबर अधिकार दे और दुःख सुख में आत्मयिता से उसका साथ दे. वो अपने कार्यालय या कार्य स्थल में किसी भी प्रकार के
शोषण का शिकार न हो. क्या
नारीवाद की परिभाषा यह नहीं हो सकती कि मैं जितना समर्पण भाव अपनी मां और बहन के प्रति रखता हूं, उतना ही अन्य महिलाओं के प्रति रख सकूं. क्या नारीवाद’ का पैमाना सिर्फ यह हो सकता है कि आप किसी लड़की को खुले में सेक्स की स्थिति पहुंचने या मास्टरबेशन करने में अपना
सहयोग करें?
मुझे स्वरा के मास्टरबेशन कोई दिक्कत नहीं है. न ही इससे कि वो अपनी निजी जिन्दगी क्या करती हैं और ना मैं इससे उसके
चरित्र प्रश्न उठाता. क्योंकि
मास्टरबेशन से चरित्र का क्या लेना देना? ये उसके निजी पल है. लेकिन मैं इतना जरूर कहूंगा कि स्वरा कभी नहीं चाहेंगी कि उनके बच्चें उनकी इस फिल्म का ये सीन देखे?..राजीव चौधरी





No comments:
Post a Comment