आज
पूरा देश दुःख के सागर में डूब रहा है। सबसे खतरनाक जगह सियाचिन ग्लेशियर पर ड्यूटी करने वाले हमारे देश के 10 बहादुर जवान शहीद हो चुके हैं। सभी जवान बुधवार
को बर्फीले तूफ़ान की चपेट में आ गए थे और बर्फ के ढेर में समा गए थे। सैनिकों के दुखद निधन से
पूरा देश दुखी है। प्रधानमंत्री मोदी, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी, उपाध्यक्ष राहुल गाँधी और अन्य नेताओं नें भी किसी
ना किसी माध्यम से दुःख व्यक्त किया है लेकिन दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के मुख से
दुःख के दो बोल भी नहीं निकले। यह देश के लिए बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है कि दलित या मुस्लिम
देखकर हमारे देश के नेता तुरंत ही ट्वीट करते हैं और भागे भागे उनके घरों पर जाकर राजनीतिक
फायदा लेने की कोशिश करते हैं लेकिन जिस चीज में उन्हें कोई राजनीतिक फायदा
नहीं दिखता उसे वे नजरअंदाज कर देते हैं।
केजरीवाल
भी इसी श्रेणी में आते हैं। सुनपेड़, दादरी और हैदराबाद में दलित छात्र
द्वारा आत्महत्या की खबर मिलते ही केजरीवाल ने तुरंत ही सनसनीखेज ट्वीट
किया था यही नहीं वे भागे भागे उनके घर पर भी गए थे और राजनीतिक रोटी
संकने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी।
लेकिन
आज केजरीवाल हर घंटे ट्वीट, रि-ट्वीट
तो कर रहे हैं लेकिन सैनिकों की मौत पर उनके पास एक भी शब्द नहीं हैं। आज सैनिकों के
लिए उन्होंने ना तो उन्होंने ट्वीट किया और ना ही फेसबुक पर पोस्ट लिखी। वे ट्विटर पर
हमेशा ऑनलाइन रहते हैं। उन्हें जैसे ही मोदी, बीजेपी, आरएसएस, दिल्ली पुलिस से जुडी कोई खबर मिलती है
तुरंत ही वे ट्वीट
करते हैं और आरोप लगाना शुरू कर देते हैं लेकिन आज सैनिकों की मौत पर उनके मुख से दुःख
के दो बोल भी नहीं निकले हैं। ऐया नहीं है कि वे ट्विटर पर नहीं हैं, वे लगातार ट्वीट, रि-ट्वीट कर रहे हैं लेकिन वे केवल जिसमें फायदा हो वही
ट्वीट कर रहे हैं।
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