जब से बीजेपी सत्ता में आई ना जाने भगवान राम पर यह कैसी
आफत आई अभी तो प्रभु श्री राम के जन्म स्थान को लेकर तारीख पर तारीख मिल रही थी अब
बिहार प्रदेश के सीतामढ़ी के एक वकील ने भगवान राम पर मुकदमा ठोक दिया था कि सीता
माता को वनवास क्यों भेजा ??कोर्ट के सामने वकील का तर्क दिया कि माता सीता का कोई
कसूर नहीं था। इसके बाद भी भगवान राम ने उन्हें जंगल में क्यों भेजा? हालांकि, जज ने पूछा कि इतनी पुरानी घटना के लिए किसे पकड़ेंगे।
कोर्ट में में जज-वकील के बीच क्या हुई बातचीत...
- वकील ने कहा, ''कोई पुरुष अपनी पत्नी को कैसे इतनी
बड़ी सजा दे सकता है? भगवान राम ने यह सोचा भी नहीं कि घनघोर
जंगल में अकेली महिला कैसे रहेगी?''
- सीजेएम ने केस की फाइल देखी और वकील चंदन सिंह से पूछा कि त्रेता युग की
घटना को लेकर केस क्यों किया है?
- त्रेता युग की घटना के मामले में किसे पकड़ा जाएगा, कौन
गवाही देगा?
- आपने केस में यह भी नहीं बताया है कि श्रीराम ने सीता जी को किस दिन घर से निकाला था?
- केस में दर्ज विवरण का आधार क्या है?
- जज के सवाल पर वकील चंदन ने कहा, "मैंने माता सीता को न्याय दिलाने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया है। मैं अदालत से सीता जी के लिए न्याय की भीख मांगता हूं।"
- "आप और हम, सब लोग भगवान राम, माता सीता और रामायण को मानते हैं।"
- "मैंने अपने केस में रामायण से घटनाओं का विवरण लिया है।"
- आपने केस में यह भी नहीं बताया है कि श्रीराम ने सीता जी को किस दिन घर से निकाला था?
- केस में दर्ज विवरण का आधार क्या है?
- जज के सवाल पर वकील चंदन ने कहा, "मैंने माता सीता को न्याय दिलाने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया है। मैं अदालत से सीता जी के लिए न्याय की भीख मांगता हूं।"
- "आप और हम, सब लोग भगवान राम, माता सीता और रामायण को मानते हैं।"
- "मैंने अपने केस में रामायण से घटनाओं का विवरण लिया है।"
पकड़ना किसे है जनाब इस देश में गरीब के अलावा कौन पकड़ा जाता
है इसमें सीधा RSS को दोषी ठहरा दो| आरएसएस को ही सजा होनी चाहिए? राम के भक्तो को सजा होनी
चाहिए? मीडिया और राजनेताओं को काम मिल जायेगा या हो सकता है कल खुद को सेकुलर
साबित करने के लिए नितीश और लालू गवाह बन जाये लालू जी अपनी हूप हूप हूप शैली में
कह दे कि देखिये रामवा की गलती थी हमने राबडी को अभी तक छोड़ा| मेरे व्यंग को पी
जाना भाई मुस्लिम वोट का मामला है कौन पार्टी ऐसा मौका हाथ से जाने देगी| जो आदमी
चारा खा सकता है वो रामायण महाभारत भी खा सकता है? किन्तु जब केस दर्ज हो ही रहे
है तो क्यों न द्रोपदी चीर हरण का भी मुकदमा दर्ज हो? क्यों ना आहिल्या के शील भंग
होने का, मेनका विश्वामित्र का, क्यों आज क्यों केवल एक सीता माता को मोहरा बनाकर
वकील चन्दन सिंह लोकप्रसिद्धि पाना चाहते है?
कठिन लगेगी बात। क्यों कि याद
आती है सीता की, याद आती सावित्री की याद आती है सुलोचना की और बहुत यादें है। फिर भी मैं कहता हुं, द्रौपदी का कोई मुकाबला ही नहीं है। उसके साथ जो अन्यान्य हुआ ऐसा किसी
महारानी तो क्या दासी के साथ भी नही हुआ असल में दुनिया की कोई महा कथा स्त्री की
धुरी के
बिना नहीं चलती है। सब महा कथाएं स्त्री की धुरी पर घटित होती है। वह बड़ी रामायण सीता की धुरी पर घटित हुई है।
राम और रावण तो ट्राएंगल के दो छोर है, धुरी तो सीता है। किन्तु ना जाने आज भी कितनी सीता माता मुकदमो में उलझी पड़ी
है रोज इस दुनिया में कितनी द्रोपदी नंगी कर दी जाती है ना जाने रोज आहिल्या का
शील भंग होता है यदि नारी जाती की इतनी ही चिंता है तो उनके मुकदमे लड़ो जो गरीबी
के कारण कोर्ट तक पहंच ही नही पाती याद है महाभारत में भीष्म पड़े है —बाणों की शय्या पर—और कृष्ण कहते है पांडवों को कि पूछ लो धर्म का राज, और वह द्रौपदी हंसती है। कि इनसे पूछते है धर्म का
रहस्य
जब में नग्न की जा रही थी, तब ये सिर झुकाए बैठे थे।
उसका व्यंग गहरा था इतना ही गहरा जितना यह सीता जी का केस? पिछले वर्ष नवंबर तक
प्रदेश में महिलाओं से जुड़े 10,898 अपराध के मामले दर्ज किए गए जिसमें बलात्कार, अपहरण,
छेडखानी,
दहेज और दहेज प्रताडना के क्रमश: 1052, 4102, 299, 1129 और
4316 मामले शामिल हैं। यदि वकील चन्दन सिंह को महिलाओं की इतनी ही चिंता है तो इन
के मुकदमों पर भी गौर करे?
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