Tuesday, 1 March 2016

अखबारों में नाचता किसान



सरकार द्वारा पेश बजट में किसान अमीर हो गया, लगता है देश समर्द्ध हो गया! गरीबी गयी अब बस अमीरी रह गयी| अखबार के पन्नों में किसान अपने लिए इतनी रकम देखकर एक बार हँसा और फिर रोया! हँसा तो यू, कि फिर सरकारी कागजों में किसान अमीर हो गया और रोया इस वजह से कि आज तक कोई सरकार आखिर क्यों नहीं समझ पाई कि किसान को क्या चाहिए? दरअसल किसान को सिंचाई के लिए पानी, बीज, खाद, उसकी फसल का वाजिब दाम और उसका नकद भुगतान| जिसे कोई भी सरकार नहीं देना चाहती| मै पिछले दिनों मोदी सरकार द्वारा जारी कुछ किसान के लिए योजना देख रहा था, पर मुझे बड़ा घनघोर आश्चर्य ये देखकर हुआ कि मोदी सरकार के विज्ञापन में किसान लेपटोप लिए बैठे थे हालाँकि लेपटोप की स्क्रीन विज्ञापन में दिखाई नहीं दे रही थी मुझे नहीं पता वो अपने लिए योजना सर्च कर रहे थे! या आत्महत्या के तरीके? किन्तु आज जिस किसान के पास खाने को जहर के पैसे नहीं वो किसान लेपटोप लेकर बैठा दिया गया हो शायद यह भी गरीबी के साथ मजाक माना जायेगा|
मेरा अधिकांश जीवन गाँवो में बीता आज भी में उस किसान मजदूर की पीड़ा समझ सकता हूँ, मैंने अभी तक कोई इक्का दुक्का किसान ही देखे होंगे जिनके पेट सीने से बाहर निकले है मैंने हमेशा किसान के पेट पर पड़ी सलवटे देखी और उसकी आँखों में कभी मौसम से तो कभी सरकार से अपने लिए धुंधली आशा की चमक देखी, मैंने 8 रूपये किलो आलू बेचते किसान को देखा और उस आलू के चिप्प्स बनाकर 800 रूपये किलो बेचते व्यापारी देखे फिर दोनों के लिए सरकार का स्नेह्लेप देखा तो पाया कि आखिर भारत में किसान आत्महत्या क्यों कर रहे हैं? और इनकी संख्या लगातार बढ़ रही है, आखिर क्यों? इस सवाल के तह तक जाने के बजाए जो सरकारें कर रही हैं वे मर्ज़ का इलाज नहीं बल्कि उसको टालने की कोशिश भर है| जेटली ने किसानों और कृषि पर बजट को फोकस करते हुए अपने बजट भाषण में कहा कि 'कृषि एवं किसानों के कल्‍याण के लिए 35,984 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। जिससे किसान की आय दुगुनी होगी सरकार का मकसद कृषि से बाजार तक संपर्क मुहैया कराने का है। किन्तु खेती और किसानी के लिए सरकार द्वारा बजट में की गई बातों से समझ में नहीं आया कि पांच साल में किसानों की आय दोगुनी कैसे हो जाएगी। ये तो बस कृषि क्षेत्र को आवंटित बजट राशि है जिसमे यह दर्शाया गया है कि किस प्रकार कितना रुपया कहाँ खर्च होना है उसका ब्योरा बताया गया है। इस बजट राशि से सीधे तौर पर किसानों का कोई भला नहीं हो सकता। हां! खेती और किसानी क्षेत्र को बेहतर बनाने के लिए धीरे-धीरे एक ढांचा जरूर खड़ा होगा जिसका फायदा एक वक्त के बाद बड़ी जोत वाले किसानों को मिल सकता है। देश का किसान इस वक्त जिन हालातों से गुजर रहा है वह किसी से छिपा नहीं है। दो दिन पहले आर्थिक समीक्षा रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया गया कि औसतन एक किसान की सालाना आमदनी 20 से 30 हजार रुपये है। चलो अब सरकार की बात मान ले कि किसान की आमदनी आने वाले समय में दुगनी होगी मतलब पांच साल बाद इस किसान की सालाना आमदनी 40 हजार से 60 हजार रुपए हो जाएगी। अगर हो भी गई तो क्या इस बात का दावा किया जा सकता है कि महंगाई का आंकड़ा दोगुना या उससे अधिक नहीं होगा? हो सकता है तब तक १०० रूपये का कफ़न पांच गुणा मंहगा होकर 500 रूपये का हो जाये?
दूसरी मुख्य बात यह कि जब मोदी सरकार आई और सरकार का मेक इन इंडिया का नारा लगा तो मुझे लगा जरुर यह सरकार कृषि जैसे मजबूत ढांचे को इस प्रोजेक्ट से जोड़ेगी किन्तु अब समय के साथ लग रहा है कि कहीं मेक इन इंडिया का वो मशीनी शेर छोटे किसान के जिन्दा बैल ना खा जाये? क्योकि खेती-किसानी पर लगातार आपदा की वजह से किसान भीषण कर्ज के बोझ तले दबे हुए हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक घाटे का सौदा होने की वजह से हर दिन 50 के करीब किसान मौत को गले लगा रहे हैं। बजट सत्र शुरू होने से पहले किसान हितों से जुड़े लोग उम्मीद जता रहे थे कि आम बजट में गांव, खेती और किसान के अस्तित्व को बचाने के लिए सकारात्मक तौर पर तुरंत राहत देने वाली कोई घोषणा या पहल होगी। क्योकि राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो 1995 से अब तक 2,96 438 किसानों ने आत्महत्या की है हालांकि जानकार इस सरकारी आकंडे को काफी कम कर आंका गया समझते हैं, जबकि इससे कहीं अधिक किसानों ने खेती-बाड़ी से जुड़ी तमाम कठिनाइयों समेत अन्य कारणों से आत्महत्या की राह चुन ली। यह उस देश के लिए बहुत दुर्भाग्य की बात है जहां की 60 प्रतिशत आबादी खेती-किसानी से गुजारा करते हैं। ऐसे में सरकार को चाहिए था कि जिस तरह से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को उबारने के लिए एक लाख करोड़ से अधिक की राशि का बजट में प्रावधान किया गया, उसी तरह से किसानों का कर्जा माफ करने के लिए बजट में यथोचित धनराशि का प्रावधान किया जाता। सब-कुछ अगर किसान के लिए किया जा रहा है तो उस किसान को बचाने का काम तो पहले किया जाना चाहिए। जो भुखमरी लाचारी के कारण मर रहा है| किसान आज मर रहा है दवा भी आज ही दी जानी चाहिए!! लेखक राजीव चौधरी 

No comments:

Post a Comment