जब सूफी
समारोह में प्रधानमन्त्री जी इस्लाम का अर्थ शांति बता रहे थे उस समय
मुजफ्फरनगर में साम्प्रदायिक सोहार्द आग की भट्टी में सुलग रहा था| केंद्रीय
कृषि राज्यमंत्री संजीव बालियान जी उत्तर प्रदेश सरकार को चेतावनी दे रहे
थे कि यदि लड़की के साथ छेड़छाड़ के आरोपियों और तमंचो से फायर करने वाले लोग नहीं
पकडे गये तो अपनी माँ बहनों की सुरक्षा के लिए हमारे नौजवान तैयार
है|साम्प्रदायिक दंगे करना करवाना कोई बड़ी बात नहीं है, माथे पर तीन तिलक
और सिर पर दो जालीदार टोपी यदि चाहे तो एक दिन में सेकड़ों मासूमों को धर्म
के बहाने अपना मनोरथ सिद्ध करने के लिए दंगे का निवाला बना सकते है|
मुजफ्फरनगर का कवाल कांड हो या गौधरा, भागलपुर दंगा हर किसी में एक छोटा
कारण होता है| जो बाद में गहरा जख्म दे जाता है| खेर अतीत का क्या रोना वो
काम तो धर्म के ठेकेदारों और राजनेताओं का होता है! हम तो सिर्फ इतना चाहते
है कि हर एक अपराधिक घटना को धर्म से जोड़कर न अशांति का माहौल बनाया जाये और
ना कानून का मजाक बनाया जाये|
हर रोज अखबारों के माध्यम से देखा जाये तो
पश्चिमी उत्तर प्रदेश धर्म के आग में जलता सा दिखाई दे जाता है| हर रोज
मनचले युवक, जगह जगह युवतियों को अपनी कामुक प्रवृति के बल पर बाजारों
स्कूलों में छेड़छाड़ कर रहे है| यदि कोई उल्टा विरोध करता है तो वो युवक
धर्म के अपमान को लेकर धर्म के खतरे का बहाना बनाकर जगह-जगह हिंसा तोड़फोड़
लूटपाट करना शुरू कर देते है| पिछले कई दिनों के अखबारों के पन्नों में कुछ
ऐसी खबरे लिपटी पड़ी है| मुजफ्फरनगर के शहर कोतवाली क्षेत्र में हनुमान चौक
के निकट स्थित मौहल्ला नयाबांस में एक हिन्दू युवती के साथ छेडछाड के
मामले को लेकर दोनों समुदाय के लोग आमने-सामने आ गए, जिसके बाद जमकर बवाल
हुआ। दोनों पक्षों के बीच जबरदस्त पथराव हुआ, जिसमें कई लोगों के घायल होने
का समाचार है। युवती का धर्म भी बताना इस लेख की मज़बूरी है और क्यों
केन्द्रीय मंत्री इस घटना पर इतना तीखा क्यों बोले| ताकि मामला साफ हो की
ये सब होता क्यों है!!
अब यह हुआ क्यों? बिलकुल साफ स्पस्ट दिखाई
दे रहा है कि या तो वो युवती उस मुस्लिम युवक का कहना मान कर बंद मकान में
अपने सम्मान समर्पण करती तो शायद यह धर्मिक टकराव ना होता!! अब उस युवती
ने अपने परिवार को अपनी प्रताड़ना की अपनी रोजाना की छेड़छाड़ की बात बताई
परिवारजनों ने इसका विरोध किया तो उक्त विशेष सम्प्रदाय का युवक धर्म के
नाम पर करीब दस बजे वह 30 - 40 साथियों को लेकर पहुंचा| यकीनन धर्म के नाम
पर ही इक्कठे किये होंगे! और लड़की के भाई को पीटना शुरू कर दिया। उसे
बचाने आए युवक से भी मारपीट की। इसके बाद दोनों ओर से पथराव और फायरिंग
शुरू हो गई। जिसे बाद अखबारों और पुलिस ने इस घटना को साम्प्रदायिक दंगा
तनाव लिखा| कोई बताये तो सही इसमें सम्प्रदाय बीच में कहाँ से आया क्या
उक्त युवक की कामुक वासनाओं को विराम देना भी क्या समस्त मुस्लिम सम्प्रदाय
की जिम्मेदारी है? जो लोग इन अपराधियों के पक्ष में खड़े होकर धार्मिक नारे
लगाते है क्या वो कभी इनसे पूछते है कि आखिर शुरुवात किस बात से हुई|
क्यों नहीं लोग इन अपराधियों का तिरस्कार कर देते|
यह एक घटना नही बल्कि वेस्ट यूपी में
रोजाना ऐसी घटना होना एक आम बात हो गयी 12 फरवरी मेरठ जिले के मवाना कस्बे
में संप्रदाय विशेष के युवक के एक छात्रा से छेड़छाड़ करने व जबरन हाथ
पकडऩे पर सांप्रदायिक तनाव के हालात बन गये। देखते ही देखते वहां पर मारपीट
होने लगी। आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर हिंदू संगठन के लोगों
ने जाम लगा दिया। 28 जनवरी मेरठ में देहली गेट क्षेत्र के सराय लालदास में
सोमवार रात नौ बजे दो बहनों से छेड़छाड़ का विरोध करने पर सांप्रदायिक बवाल
हो गया। दोनों पक्षों में जमकर हुई मारपीट और पथराव के बाद फायरिंग भी
हुई। इसमें दोनों बहनों समेत आठ लोग घायल हो गए थे|
गुरुवार 17 मार्च मेरठ कोचिंग से घर लौट
रही एक छात्रा के साथ शनिवार शाम बाइक सवार तीन मनचलों ने छेड़छाड़ की। वह
नजरअंदाज कर आगे बढ़ गई तो भी पीछा नहीं छोड़ा। लगातार फब्तियां कसते रहे।
कई बार उसका दुपट्टा खींचा और विरोध करने पर छात्रा को थप्पड़ जड़े गये क्या
आप लोग इन खबरों को साम्प्रदायिक घटना कह सकते है? नहीं ना! क्योकि ये
वासना के कीड़े धर्म की आड़ में अपना खेल खेलते है और वोटो के लिए राजनेता
इनका समर्थन करते है कानून राजनीति के कुरते की जेब में रखा है तो यह सब
कैसे रुकेगा? अभी भी समय है इन वासना के कीड़ों का दमन आवश्यक है वरना यह
लोग धर्म की आड़ में समाज और देश को खा जायेंगे|
लड़ने के बहाने पहले से तय हैं अब एक
अच्छा नागरिक होने के लिये मेरा कुछ को दुश्मन मानना और एक अनचाहे गर्व से
भरे रहना आवश्यक है यह घृणा और यह गर्व मेरे पुरखों ने जमा किया है
पिछले 1400 सालों से मैं अभिशप्त हूँ एक हज़ार साल के बोझ को अपने सिर पर
ढोने के लिये अब मैं सौंपूंगा यह बोझ अपने मासूम और भोले बच्चों को क्योकि
जन्म लेते ही मुझे हिन्दू, मुसलमान , या फलाना या ढिकाना बना दिया गया
जन्म लेने से पहले ही मेरे दुश्मन भी तय कर दिए गये| मेरा दीन मुझे किस किस
चीज की इजाजत देता है मुझे समझा दिया गया जन्म से पहले ही मेरी ज़ात भी तय
कर दी गयी>
महाभारत न तो कभी शुरू होता और न कभी अंत, वह मनुष्य के अज्ञान के साथ चलता ही रहता है। कृष्ण ने गीता कही, उसके पहले भी वह चल रहा था; कृष्ण ने गीता पूरी की, तब भी वह चल रहा है। आदमी जैसा है, वैसा तो लड़ता ही रहेगा। कितना ही बचाओ, कितना ही समझाओ, अहिंसा का पाठ पढ़ाओ, कोई फर्क न पड़ेगा। वह अहिंसा के लिए लड़ेगा। कोई फर्क नहीं पड़ता। तलवारें उठ जाएंगी, अहिंसा की रक्षा करनी है। कितना ही धर्म सिखाओ, वह धर्म के लिए लड़ेगा, इस्लाम खतरे में है, हिंदू धर्म खतरे में है। वासना का खेल खेलना हो किसी की इज्जत आबरू लूटना हो, इस्लाम धर्म खतरे में है, हिन्दू खतरे में है| फिर कोई नहीं पूछता कि तेरा धर्म है कहां? जो खतरे में है| कहीं धर्म भी खतरे में होते हैं? लेकिन लड़ने के लिए बहाने हैं। कोई भी बहाने काम दे जाते हैं। लोग इन्हें साम्प्रदायिक दंगे कहते है| लेखक राजीव चौधरी
http://readerblogs.navbharattimes.indiatimes.com/likha-ret-par/entry/%E0%A4%B8-%E0%A4%AE-%E0%A4%AA-%E0%A4%B0%E0%A4%A6-%E0%A4%AF-%E0%A4%95-%E0%A4%A6-%E0%A4%97-%E0%A4%95-%E0%A4%9B-%E0%A4%AF-%E0%A4%B9-%E0%A4%A4-%E0%A4%B91
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