आज देश के अन्दर
राष्ट्रभक्ति और देशद्रोह नाम की दो दुकान बड़ी धडल्ले से चल रही दोनों को थोक में
सस्ता माल मिल रहा और दोनों के पास ग्राहकों की भी कमी नहीं है| ये गद्दार, वो
गद्दार, ये राष्ट्रभक्त वो राष्ट्रभक्त की आवाज़े चाय की दुकान से लेकर संसद तक
सुनी जा सकती है| कल जाने माने शायर लेखक , प्रगतिशील बुद्धिजीवी एवं राज्य सभा सदस्य जनाब जावेद अख्तर साहब ने संसद में असदउद्दीन ओवैसी को मानों धोकर निचोड़ डाला जावेद अख्तर के इस
राष्ट्रवादी और धर्मनिरपेक्ष भाषण से पूरा सदन गदगदायमान होता रहा। जावेद अख्तर साहब न केवल स्वयंभू राष्ट्रवादी लोगों को आइना दिखाया| बल्कि एक साँस में तीन-तीन बार ”भारत माता की जय” बोलकर जावेद अख्तर ने कटटरपंथी हिन्दुत्ववादियों को भी करारा जबाब दिया है।
ओवेसी और आजम भारतीय
मुस्लिम जगत के दो राजनैतिक चेहरे है| भारत का एक बड़ा मुस्लिम धडा इन्हें अपना
मसीहा तक समझता है| उन बेचारों को नहीं पता यह क्या कह रहे है बस इतना पता है मुस्लिम
नेता है तो जो कहा सही ही कहा होगा| अनपढ़ अशिक्षित मुस्लिम अभी तक नहीं समझ पा रहा
कि यह लोग अपनी राजनीति के लिए भारत के समस्त मुस्लिम जगत को बदनाम करने में कोई
कसर नहीं छोड़ रहे है| कुछ साल पहले आजम खान ने भारत माता को डायन कहकर संबोधित किया
था| जिसको लेकर मीडिया में काफी आलोचना हुई थी| कल परसों आजम खान ने साध्वी प्राची
से प्यार करने की बात कही| दोनों बयान सही मायने में निंदनीय है| क्योकि राष्ट्र
को डायन और साध्वी से प्यार यह सिर्फ एक साम्प्रदायिक सोच दर्शाकर एक विशेष वर्ग
का बड़ा नेता बनने की चाह रखने जैसा है|
कुछ
दिन पहले ही संसद में पीएम मोदी जी ने निदा फाजली जी का जिकर किया था मुझे उम्मीद
है कि वे जावेद अख्तर को इग्नोर नहीं करेंगे। और संघ वालों को भी यह नहीं
भूलना चाहिए कि सिर्फ जावेद अख्तर, निदा
फाजली ही नहीं भारत के करोड़ों मुसलमान भी इसी तरह के विचार रखते हैं। अपनी सोच का दायरा
घटा कर हर मुसलमान को आतंकी न समझें ! और ‘भारत माता की जय’ का नारा लगाने वाले हर शख्स को ‘देशभक्त’ समझने की भूल भी न करें!
हम
सबके लिए यह देश हमारी मातृभूमि है, माँ है, इसलिए
हम ‘भारत माता की जय ‘बोलते हैं। मुझे साहित्यकार राम तिवारी
के यह बात बिलकुल सही लगी कि दरअसल ओवेसी को ‘भारत माता की जय से कोई समस्या नहीं है।
देश से भी उन्हें कोई समस्या नहीं है। हिन्दुओं से भी उन्हें कोई समस्या नहीं
है। वास्तव में ओवैसी की समस्या ये है कि वे महज एक व्यक्ति नहीं बल्कि ‘विचारधारा’ हैं। यह ‘विचारधारा’ घोर साम्प्रदायिक है और यह सिर्फ ओवैसी
की ही नहीं है। बल्कि यह विचारधारा सिमी की भी है। यह विचारधारा हरकत-उल अंसार
की भी है ,यह कश्मीर में
दुख्तराने हिन्द की भी है। कश्मीर में पत्थरबाजी करने वालों की भी है, केरल में मुस्लिम लीग की है। आंध्र,
तेलांगना में आईएम और ओवैसी की है। वही विचारधारा
कभी सैयद शाहबुद्दीन की भी रही है। ऐ आर अंतुले, गनीखान चौधरी, इमाम बुखारी, आजम ख़ाँ ने इस विचारधारा का जमकर भोग
किया है। ममता,
मुलायम, लालू और नीतीश ने भी इसका स्वाद चखा है।
देश विभाजन के बाद -पाकिस्तान
बन जाने के बाद इस विचार धारा से ही पाकिस्तान बना था। लेकिन
भारत को अपना वतन
मानने वाले जावेद अख्तर, निदा
फाजली, अमजद अली खान जैसे करोड़ों मुसलमानों को
जब कुछ स्वार्थी लोग ‘दारुल
हरब’ का ज्ञान बाँटने की जुर्रत करते हैं तो
उन्हें औकात बता दी जाती है। जैसे कि जावेद अख्तर ने राज्य सभा में ओवैसी के नकारात्मक बयान
पर उसे आइना ही नहीं दिखाया बल्कि जावेद साहब ने ओवैसी को गली मोहल्ले का नेता
बताकर उसकी असल औकात दिखा दी है।
जापान के बारे में एक
कथा प्रचलित है कि जापान की स्कूलों में बच्चों को तीन प्रश्नोत्तर पढ़ाये जाते है| प्रथम प्रश्न है कि आप सबसे ज्यादा किसे मानते है उत्तर भगवान बुद्ध को| दूसरा प्रश्न- अगर कोई भगवान बुद्ध पर हमला कर दे तो आप क्या करेंगे! उत्तर हमला करने वाले का सिर उड़ा देंगे तीसरा प्रश्न अगर भगवान बुद्ध ही जापान पर हमला कर दे तो क्या
करोगे उत्तर हम भगवान बुद्ध का ही सिर उड़ा देंगे| अर्थात जापान देश में सिखाया जाता है कि देश, धर्म से भी बढ़कर है और कोई भी धर्म और भगवान देश से बड़ा नही होता। अगर भगवान भी देशद्रोह करने को बोले तो भी मत करो और हमारे यहाँ भारत माता की जय बोलने से लोगो का धर्म खतरे में पड़ रहा है और हंगामा हो रहा है।
लेखक राजीव चौधरी
करोगे उत्तर हम भगवान बुद्ध का ही सिर उड़ा देंगे| अर्थात जापान देश में सिखाया जाता है कि देश, धर्म से भी बढ़कर है और कोई भी धर्म और भगवान देश से बड़ा नही होता। अगर भगवान भी देशद्रोह करने को बोले तो भी मत करो और हमारे यहाँ भारत माता की जय बोलने से लोगो का धर्म खतरे में पड़ रहा है और हंगामा हो रहा है।
लेखक राजीव चौधरी
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